वासना का भूत-2

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लवीना का गोरा बदन, पांच फुट तीन इंच की लम्बाई और उसके उरोजों का आकार बत्तीस रहा होगा। चेहरा थोड़ा सा लम्बा, बाल उसके कूल्हों को छूते हुए, बड़ी ही मस्त लगती है वो ! जब वो चलती तो ऐसा लगता जैसे हिरणी जंगल में घूम रही हो।

शाम तक हमारे बीच इशारेबाजी चलती रही। लवीना भी बहुत खुश नजर आ रही थी।

शाम तक हम काम में व्यस्त रहे फिर शाम को हम तीनों काम ख़त्म करके पीने के लिए बैठ गए। व्हिस्की पीते हुए मैंने मोहित से कहा- मोहित, अब लवीना पर हाथ मत डालना।

मोहित ने कहा- क्यों क्या हुआ? कुछ बात हो गई है क्या?

मैंने मोहित से कहा- नहीं यार, अब वो तुमसे नहीं होगी !

मोहित ने कहा- क्यों नहीं होगी? आज तो वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी। बस आज रात को ही उससे बात कर लूँगा।

मैंने कहा- रहने दे ! कुछ फायदा नहीं होगा।

इतनी देर से सुरेश चुप बैठा था, वो बोल पड़ा- क्यों नहीं होगी? इसके पूरे पूरे चांस लग रहे हैं, वो इससे ही सेट होगी।

मैंने कहा- नहीं होगी क्योंकि वो मुझसे हो चुकी है।

मेरी बात सुनकर उन दोनों के मुँह खुले के खुले ही रह गए।

फिर मैंने कहा- मैं शर्त जीत गया हूँ, बताओ अब कैसे करना है?

मोहित बोला- ऐसे कैसे जीत गया? जब तक तू हमें दिखा नहीं देता, तब तक हम नहीं मानेगे।

मैंने कहा- ठीक है, मैं आज रात तुमको दिखा भी दूँगा जो तुम देखना चाहते हो, पर तुममें से कोई नहीं आएगा उस टाइम जब मैं उस के पास रहूँ तो।

दोनों ने कहा- ठीक है !

फिर उसके बाद हम तीनों ने खाया पिया, मैं तो ख़ुशी में पी रहा था पर मोहित शायद गम में पी रहा था और सुरेश को तो कोई मतलब ही नहीं था क्योंकि चाहे मैं जीतता या फिर मोहित, उसको तो पार्टी ही मिलनी थी दोनों तरफ से।

फिर रात को संगीत कार्यक्रम था, हम तीनों आज भी अपनी जगह पर जाकर लेट गए। रात एक बजे तक गाना बजाना हुआ और हम तीनों ये सब देख रहे थे। उसके बाद सब सोने के लिए चले गए और लवीना भी नीचे चली गई तो मोहित ने कहा- ले भाई, अब तो वो भी चली गई, अब वो नहीं आएगी। वैसे ही झूठ बोल रहा था हम से?

मैंने कहा- अभी रुको तो सही, वो अभी आएगी ऊपर सोने के लिए।

मैंने अपनी बात ख़त्म की ही थी कि लवीना अपना बिस्तर ऊपर लेकर आ गई। उसको ऊपर आता देख मैंने दोनों से कहा- अब तुम लेट जाओ। उसको जरा भी शक न हो कि तुम जाग रहे हो।

उन दोनों ने लवीना को देखा तो वो आराम से चुपचाप लेट गए, कुछ देर तक हम ऐसे ही लेटे रहे तब तक लवीना भी अपना बिस्तर चारपाई पर बिछा कर लेट चुकी थी और वो मुझे ही देख रही थी।

करीब आधे घंटे बाद मैंने उसको इशारे से पूछा- मैं आ जाऊँ तुम्हारे पास?

तो उसने इशारे से पूछा- जो तुम्हारे साथ लेटे हैं वो सो गए क्या?

मैंने कहा- हाँ, ये दोनों सो गए हैं।

हमारी सारी बात इशारे में ही हो रही थी तो उसने कहा- ठीक है, आ जाओ !

फिर मैंने भी उसको कहा- ठीक है, मैं आ रहा हूँ।

मैंने सुरेश और मोहित को धीरे से कहा- मैं लवीना के पास जा रहा हूँ और तुम दोनों में से कोई भी मत आना और जो देखना है, ऐसे देखना कि उसको लगे कि तुम सो रहे हो !

और उसके बाद मैं वहाँ से उठा और लवीना के पास जाने लगा।

आज मैंने टी शर्ट और लुंगी पहनी हुई थी और उसके नीचे कुछ नहीं पहना था। मैं सीधे उसकी चारपाई के पास गया तो उसने अपने ऊपर एक मोटी सी चादर ओढ़ रखी थी मैंने उसकी चादर ऊपर उठाई और मैं भी उसके साथ लेट गया मुझे लेटने के लिए उसने जगह छोड़ दी। मैं आराम से लेट गया अब वो और मैं साथ साथ लेटे हुए थे।

ऊपर छत से मोहित और सुरेश हमें देख रहे थे। मैंने लेटने के बाद चादर सही से ओढ़ ली। फिर लवीना ने करवट लेकर अपना मुंह मेरी तरफ कर लिया। मैंने अपना एक हाथ उसके गाल पर रख दिया और अपने होंठ उसके होंठ से मिला कर मैं लवीना को चूमने लगा।

लवीना ने अपना हाथ मेरे सर के बालों पर ले जाकर मेरे बालों को सहलाते हुए चुम्बन में मेरा सहयोग करने लगी। फिर मैंने उसको चूमते हुए अपना हाथ उसकी चूची पर रख दिया।

जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी चूची पर रखा तो उसने मुझे चूमना बंद कर दिया और मेरी आँखों में देखने लगी पर उसने कहा कुछ नहीं। लवीना की चूची मेरे हाथ में पूरी आ रही थी।

मैंने उसको चूमना बंद नहीं किया था, मैं अब उसको क़िस करते हुए उसकी चूचियाँ दबाने लगा। लवीना की सांसें तेजी से चलने लगी थी। मैं एक एक करके उसकी दोनों चूचियाँ दबा रहा था उसकी सख्त चूचियाँ दबाने में मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। लवीना ने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली थी।

कुछ देर बाद मैंने उसका कमीज ऊपर कर दिया और ब्रा भी ऊपर कर दी। अब उसकी नग्न चूचियाँ मेरे हाथ में थी। मैं थोड़ा सा नीचे की तरफ हुआ और उसकी एक चूची को अपने हाथ में दबा कर चूसने लगा। लवीना को और भी मज़ा आने लगा तो उसने अपने एक हाथ से मेरा सर पकड़ कर अपनी चूची पर दबाने लगी।

मैं बारी बारी दोनों चूचियाँ चूस रहा था। लवीना भी पूरी मदहोश हो चुकी थी, उसकी मदहोशी का आलम यह था कि उसका अपना एक हाथ उसकी चूत पर पहुँच गया था और वो अपनी चूत को सहला रही थी मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया।

फिर मैं उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ रख दिया। लवीना की चूत बहुत ही गर्म थी और मेरा लंड भी अपने पूरे आकार में आ चुका था, मेरा लंड लुंगी से बाहर निकल कर उसकी जांघों से टकरा रहा था। फिर मैंने उसकी पेंटी के अन्दर हाथ डाल दिया।

लवीना की चूत पर एक भी बाल नहीं था, शायद उसने आज ही अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे। उसकी चूत बहुत ही चिकनी थी। फिर मैंने उसकी चूत को सहलाने लगा और उसकी चूत सहलाते हुए अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। जैसे ही मेरी उंगली लवीना की चूत में गई तो वो उछल पड़ी।

लवीना ने मेरा हाथ पकड़ लिया और वो मुझसे बोली- साजन, ये क्या कर रहे हो? किसी ने देख लिया तो बहुत बदनामी होगी।

मैंने उससे कहा- जान, कुछ नहीं होगा और फिर सब सो रहे हैं, किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा।

मेरे इतना कहते ही वो कुछ नहीं बोली।

मैंने अपने मुँह से चादर हटा कर देखा तो सुरेश और मोहित हम दोनों को ही देख रहे थे। मैंने उनको इशारे से पीछे होने के लिए कहा तो वो पीछे की तरफ हो गए। फिर मैंने लवीना के ऊपर से भी चादर हटाई और उसका कमीज निकलने लगा वो भी बड़े प्यार से अपना कमीज निकलवा रही थी।

फिर मैंने उसकी ब्रा भी निकाल दी। अब वो मेरे सामने ऊपर से नंगी हो चुकी थी मैंने भी अपनी टीशर्ट ऊपर दी। फिर मैंने अपने और लवीना के ऊपर चादर डाल ली। मैंने लवीना को लेटे हुए अपने सीने से लगा लिया उसकी चूचियाँ मेरे सीने में चुभने लगी क्योंकि उसकी चूचियाँ बहुत ही तन चुकी थी।

फिर मैंने उसकी नंगी चूची को पकड़ा और उसको धीरे धीरे दबाने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने उसकी चूची पर अपना मुँह लगा दिया और लगा उसकी चूची पीने। मुझे उस वक़्त बहुत ही अच्छा लगा रहा था। लवीना भी अब पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी।

मैं एक एक कर के दोनों चूची पी रहा था और लवीना मेरे सर के बालों को सहला रही थी। मेरा लंड अब फटने की कगार पर आ चुका था। तो मैंने उसकी सलवार भी निकाल दी और उसके बाद उसकी पेंटी भी उसके जिस्म से अलग कर दी। अब लवीना पूरी तरह नंगी मेरे साथ लेटी हुई थी।

मैंने भी अपनी लुंगी पूरी निकाल दी। अब हम दोनों ही नंगे एक दूसरे के जिस्म से लिपटे हुए थे। फिर मैं लवीना के ऊपर आ गया और उसके लबों को चूसते हुए उसके उरोज दबाने लगा, मेरा लंड लवीना की चूत पर रगड़ खा रहा था।

फिर मैंने अपने हाथ से लवीना की चूत पर अपना लंड सही से छेद पर टिकाया और फिर से उसके लबों को चूसने लगा।

मैंने लवीना के दोनों कंधों को अपने हाथ से पकड़ा और उसकी चूत में अपना लंड घुसाने लगा। अभी मेरा लंड लवीना की चूत में कुछ ही घुसाया था कि वो अई… आह…आआ… आऐईई… करके चीख पड़ी।

मैंने लवीना का मुंह अपने होंठो से बंद कर दिया था वरना उसकी चीख से आसपास के लोग उठ जाते। लवीना चीखना चाह रही थी मगर वो चाहकर भी अपने मुँह से आवाज नहीं निकाल पा रही थी।

लवीना की चूत में अभी मेरे लंड का टोपा ही अन्दर गया था। जैसा कि आप सब जानते हो, मेरा लंड बहुत ही अच्छा है और मेरा लंड कोई भी लड़की या ओरत आसानी से अपनी चूत में नहीं ले पाती है। लवीना पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी। फिर मैं अपना लंड उतना ही उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा।

अब शायद उससे भी मज़ा आ रहा था। फिर मैंने एक धक्का उसकी चूत पे दे मारा। जैसे ही लंड उसकी चूत में और अन्दर घुसा तो इस बार वो दर्द से पागल ही हो गई और बहुत जोर से चिल्लाई- आह… आआ… आईई… मरर… गईई… ईई…

मेरा लंड अब उसकी चूत में आधा जा चुका था। लवीना की एक ही चीख निकली थी कि मैंने उसका मुंह अपने लबों से बंद कर दिया।

फिर मैंने एक ओर जोरदार झटका लवीना की चूत पर दे मारा। इस बार वो दर्द से आईई… मरर… गईई… ईईईई…बिलबिला गई और लवीना लगभग बेहोशी की हालात में पहुँच गई थी।

मैं लवीना के ऊपर ऐसे ही लेटा हुआ था। कुछ देर बाद जब उसका दर्द कम हुआ। जब वो पूरी तरह से शांत हो गई, तो मैंने उससे पूछा- अब आगे क्या करने का इरादा है?

लवीना बोली- जब मैं दर्द से चिल्ला रही थी तब तुमने सुना नहीं, तो अब क्यों पूछ रहे हो। अब तो किला फ़तेह कर लिया है मेरे राजा आपने, अब तो बस तुम भी मज़ा करो और मुझे भी मज़ा दो। आज मेरी चूत को फाड़ दो।

फिर मैं लवीना की चूत में अपना लंड धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा। अब लवीना भी आहें भर रही थी और मैं उसको तेजी से चोद रहा था। लवीना को चोदते हुए कब हमारे ऊपर से चादर हट गई। हमें पता भी नहीं चला, मेरी चुदाई करने की स्पीड लगातार बढ़ने लगी।

लवीना के मुंह से टूटे फूटे शब्द निकल रहे थे- राजाआआ… आह्ह्… बड़ा हीईई मस्त लंड आआऐइईई… आप का आआआ… आऊऊओफ़्फ़… आआह्ह्ह… साजन बहुत मज़ा आ रहा है !और मैं तो उसको बहुत ही प्यार से उसकी चूत में अपना लंड पेले जा रहा था।

मेरे चुदाई करने के तरीके से वो मदहोश हो रही थी और कुछ देर बाद लवीना से मुझसे कहा- मेरा होने वाला है। तुम और तेजी से धक्के लगाओ !

और फिर मैं लवीना की चूत पर जोर जोर से धक्के लगाने लगा। लवीना और मैं दोनों ही साथ साथ झड़े। उसकी चूत मेरे वीर्य से भर गई थी और चूत से मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था।

हम दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे। मेरा लंड लवीना की चूत के खून से सना हुआ हुआ था और उसकी चूत और उसकी चारपाई का बिस्तर भी खून से सना हुआ था। जब हमारे सर से वासना का भूत उतर गया तो हमें ध्यान आया कि हम दोनों नंगे पड़े हैं। हमने जल्दी से चादर ओढ़ी। तब मुझे भी ध्यान आया कि सुरेश और मोहित हमें देख रहे हैं पर यह बात लवीना को तो पता नहीं थी। मैं उसके साथ सुबह के चार बजे तक रहा।

सुबह चार बजे मैं वापस अपने बिस्तर पर आ गया तो देखा वो दोनों सो रहे थे। मैं भी चुपचाप लेट गया, चूँकि मैं पूरी रात का जागा हुआ था तो मुझे लेटते ही नींद आ गई।

सुबह 9 बजे सुरेश ने मुझे जगाया, फिर हम दोनों मोहित के पास गए। वो बहुत उदास लग रहा था क्योंकि जिस लड़की को वो पसन्द करता था, मैंने उस लड़की को उसके सामने चोद दिया था।

शर्त में जीते हुए रूपये से हमने शानदार पार्टी की। फिर मैंने उसको कई बार चोदा, मैं जब भी अपनी दीदी के घर जाता तो लवीना को जरूर चोदता था। फिर कुछ दिनों बाद उसकी भी शादी हो गई।

दोस्तो, यह कहानी आपको कैसी लगी, जरूर बताना।

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