तीन बुड्डों ने मेरी चूत की सील तोड़ी-1

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Teen Buddon Ne Meri Seal Todi-1

मेरा नाम अंकिता है। मैं भोपाल की रहने वाली हूँ.. घर में सभी मुझे निकी कहते हैं। बड़ी मुश्किल से मैं बहुत दिनों में अपनी सच्ची घटना लिख कर बताने की हिम्मत जुटा पाई हूँ।

यहाँ मेरा लिखा हुआ एक-एक शब्द सच है.. ये कोई कहानी नहीं.. बल्कि मेरी सच्चाई है।

मेरी उम्र अभी 19 साल की है.. यह बात अभी कुछ दिन पहले की ही है।

जब मैं 18 साल की हुई थी.. उस समय जो मेरे साथ हुआ.. उसे सुनकर और जानकर.. आप सब अपने होश खो देंगे।

मेरे घर के सामने सामने एक जैक्सन जॉन्सन नाम का लड़का रहता था। वो मुझे रोज देखता था.. वो हैण्डसम था.. जवान था.. मैं भी उसे देखने लगी थी। वो मुझे अच्छा लगने लगा था..

मैं 12वीं पास करके कॉलेज में पहुँची ही थी कि एक दिन उसने मुझे दोस्ती के लिए बोला.. मैंने ‘हाँ’ कर दिया। उसके बाद वो मेरे और करीब होने लगा, मेरी उससे बातें होने लगीं, मुझे भी वो पसंद आने लगा…

एक दिन उसने मुझे प्रपोज किया और कहा- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ निकी…

वो भी मुझे निकी ही कहता था.. चूंकि वो मुझे भी पसंद था.. इसलिए मैंने ‘हाँ’ कर दिया।

अब हम दोनों ब्वॉय-फ्रेण्ड.. गर्ल-फ्रेंड हो चुके थे.. धीरे-धीरे हम दोनों एक-दूजे से खुलने लगे।

वो मुझे कोचिंग अपनी बाइक से ले जाने लगा। मैं थोड़ी दूर तक बस का बोल कर घर से जाती.. फिर वो मुझे मिल जाता.. और हम दोनों आइस्क्रीम खाते.. वही खिलाता था।

फिर हमारा प्यार और जवान हुआ.. मैसेज और फोन से वो मुझे चुम्बन लेने लगा और रोमान्स की बातें करता, मुझे भी मन ही मन ये सब बहुत अच्छा लगता था।

फिर वो मुझसे एक दिन मेरा फिगर और साइज़ के बारे में पूछने लगा।

मुझे वास्तव में अपनी ब्रा के अलावा और कुछ पता नहीं था.. मैंने उसके पूछने पर चैक किया.. तो मेरे जिस्म का नाप कुछ यूँ निकला.. मेरी कमर 28 निकली.. छाती 34 इंच की और चूतड़ 32 इंच के निकले।

उसके ये सब बहुत बार पूछने पर मैंने उसे बता दिया।

उस दिन से तो वो पागल ही हो गया और बहुत बोल्ड मैसेज करने लगा।

अब वो रोज ही फोन पर मेरे कपड़े उतार कर अपने साथ सोने की बातें करने लगा।

मैं उसे मना करती.. पर मैं भी जवानी में अपने कदम रख चुकी थी और अभी 18 साल की ही हुई थी.. पर मुझे ये सब इतना अच्छा लगने लगा कि क्या बताऊँ।

मेरा भी बहुत मन करता जब वो वैसी बात करता…

एक दिन हम दोनों घर के सामने पार्क में बैठे थे.. शाम को 7 बज गए थे.. थोड़ा सा अंधेरा होने लगा।

तभी हमने महसूस किया कि सब लोग पार्क से जा चुके थे। हालांकि साधारणतयः ऐसा होता नहीं था…

अकेलेपन का फ़ायदा उठा कर वो मुझसे बोला- निकी.. आँख बंद करो.. मुझे कुछ देना है।

मैंने मना किया.. तो उसने अपनी कसम दे दी और बोला- जब तक मैं ना बोलूं.. आँख मत खोलना।

मुझे मानना पड़ा और मैंने अपनी आँख बंद कर लीं और जैसे ही आँख बंद की.. उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।

पहली बार 18 साल में किसी लड़के ने मेरे होंठों को चूमा था! मैं घबरा गई.. पर उसने मुझे कसके पकड़ भी लिया था.. और फिर वो मेरे होंठों को चूमता ही रहा। अब वो मेरे होंठों को थोड़ा सा चाटने भी लगा.. तो मेरा मुँह खुल गया।

उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी और अन्दर चाटने लगा था।

अब उसकी जीभ से मेरी जीभ मिल चुकी थी।

मुझे जाने क्या होने लगा.. एकदम से मुझे नशा सा होने लगा और कब उसके हाथ मेरे सीने पर पहुँच गए.. मैं जान भी नहीं पाई…

जब वो ज़ोर से मेरे मम्मों को दबाने लगा.. तब मैंने खुद को उससे छुड़ाना चाहा.. पर वो मेरे उरोजों को दबाता और मसलता ही रहा।

इसके साथ ही वो मेरे मुँह के अन्दर अपनी जीभ डाले हुए लगातार मुझे चूस भी रहा था।

मैं मदहोश सी होने लगी.. तभी उसका एक हाथ मेरी जीन्स की जिप पर रख कर मसलने लगा.. एक बार तो ज़ोर से उसने मेरी चूत को भी ऊपर से दबा दिया।

आज पहली बार किसी लड़के ने मेरे हर अनछुए अंगों को छूकर जाने क्या कर दिया था। मैं घबरा भी गई थी.. पर मैं अपने होश में नहीं थी।

इतने में एक ज़ोर से आवाज़ आई- यह क्या कर रहे हो बेवकूफों.. ये कोई जगह है.. इन सब हरकतों के लिए…

मैं डर कर कांप गई.. वो भी घबरा गया और उसने मुझे जल्दी से छोड़ा.. हम दोनों हाँफते रहे.. हम एकदम से डर चुके थे।

हमारे सामने दो बुजुर्ग व्यक्ति खड़े थे। एक मेरे घर के बगल के श्रीवास्तव जी… जिन्हें मैं दादा जी कहती थी.. दूसरे भी हमारी कॉलोनी के ही थे.. वे भी करीब 65 साल से ऊपर ही थे। दोनों मेरे बाबा के उमर के थे.. करीब 60 साल या 65 साल के थे।

मैं इतनी डर गई कि मेरे आँसू निकलने लगे और मैं रोने सी लगी।

तब उन्होंने जैक्सन को गाली दी- साले हरामी.. लड़की को यहाँ पब्लिक पार्क में ऐसे करता है.. भाग यहाँ से.. आज से दिखना नहीं.. साले…

वो उठा और भाग गया।

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

फिर वे मेरी तरफ घूम कर मुझसे बोले- तू भी घर जा.. कितनी बिगड़ गई है.. लगता है तेरे घर में तेरे माँ-बाप से बताएँ तेरी करतूत.. कि अपनी बेटी की शादी करो.. नहीं तो कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहोगे…

मैं तुरन्त उठ कर भागी.. मैं घर तो गई.. पर पूरी रात बस रोते घबराते रही कि कहीं घर में सबको पता चला.. तो पापा, चाचा और बाबा, मम्मी को क्या मुँह दिखाऊँगी…

एक बार तो लगा कि कहाँ मुँह छुपाऊँ.. ये मैंने क्या कर डाला.. पर जैसे-तैसे रात गुज़री.. सुबह कॉलेज भी डरते हुए गई।

मुझे कुछ ऐसा लग रहा था कि कॉलेज से लौट कर घर ही ना जाऊँ.. कहीं वो दोनों दादा जी लोगों ने मेरे घर में बता ना दिया हो.. तो मैं तो मर ही जाऊँगी।

पर जब मैं डरते-डरते घर पहुँची.. तो घर में सब लोग सामान्य थे। मुझे कुछ ठीक लगा.. पर फिर रात में वही सब सोचती रही.. एक सेकेंड के लिए भी नहीं सोई…

किसी तरह सुबह हुई.. उन्हीं दिनों मेरे छमाही पेपर चालू होने वाले थे और फिर आज यह तीसरा दिन था।

आज रविवार था.. सब लोग घर से शाम को घूमने जा रहे थे.. बस मुझसे पापा बोले- तुम पढ़ना…

मैं सबको बाहर ‘बाय’ बोलने आई.. तभी वहाँ सामने ही बगल वाले दादा जी घर के सामने खड़े थे।

पापा उन्हीं से बात करने लगे.. मुझे उन्हें देख कर ही घबराहट और डर लगने लगा कि कहीं वे पापा से बोल ना दें।

तभी मेरे सामने पापा उनसे बोले- निकी के पेपर हैं तो वो घर में रहेगी और पढ़ेगी.. बाकी हम सब लोग जा रहे हैं.. रात में 9-10 बजे तक आ जाएँगे।

उस समय दोपहर के 3 बजे थे।

पापा मुझसे बोल कर चले गए कि मन लगा कर पढ़ना.. और मैं डरते.. घबराते अन्दर आ गई।

मैंने अन्दर से दरवाजा बंद किया.. किताबें खोलीं और बिस्तर में लेटी हुई वही सब सोच रही थी कि किसी दिन ये बात बता दी गई.. तो मैं तो मर ही जाऊँगी।

मेरी किताब बस खुली ही थी.. पिछले तीन दिन से ना कुछ खाना अन्दर जाता था, ना सो पाती थी… बस यही डर लगा रहता था कि कहीं घर में किसी को पता ना चल जाए।

मैं जैक्सन से सब प्यार-व्यार भूल गई थी, बिस्तर पर लेटे-लेटे यही सब सोच ही रही थी कि तभी मेरे घर की घन्टी बजी।

मैंने दरवाजा खोला.. तो फिर घबरा गई। मेरी आँखें भय से खुली की खुली रह गईं… दरवाजे पर वही बगल वाले दादा जी अपने उन्हीं हमउम्र साथी के साथ खड़े थे।

मेरा आपसे निवेदन है कि मेरी कहानी के विषय में जो भी आपके सुविचार हों सिर्फ उन्हीं को लिखिएगा।

मेरी सील टूटने की कहानी जारी है।

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