लण्ड लीलने की ललक

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प्रेषिका : रत्ना शर्मा सम्पादक : जूजाजी

हैलो, मैं रत्ना शर्मा… आपने मेरी दोनों कहानियां पढ़ी होंगी.. अब मैं अपनी एक और घटना बताने वाली हूँ.. जो मेरी जिंदगी में.. मेरे साथ में हुई है..

जो नए पाठक हैं उन्हें मैं एक बार फिर से अपना परिचय दे देती हूँ.. मैं रत्ना.. अच्छे घर की शादीशुदा महिला हूँ.. मैं नाटे कद की गठीले बदन की महिला हूँ मेरी उम्र 33 साल है।

अब तक आपने मेरी उस कहानी में पढ़ा था कि मेरी दूर की चचेरी बहन के पति कमलेश ने मेरी नंगी फोटो ले ली और मुझे धमका कर डराने लगा- जीजी बाई.. मैं जीजाज़ी को सब कुछ बता दूँगा कि आपके और गुरूजी के बीच चक्कर है.. अब मैं क्या करती.. अपजी इज्जत बचाने का मेरे पास कोई और उपाय ही नहीं बचा था.. तो मुझे कमलेश जी की बात माननी पड़ी। इसके बाद वो मुझसे फोन पर अश्लील बातें करने लगे।

और एक दिन मैं मंदिर जा रही थी। तो मुझे रास्ते में मिल गए और अपनी बाइक पर बिठा कर मुझे पास के जंगल में ले गए, जहाँ एकदम उजाड़ पड़ा था.. कोई आता-जाता नहीं था। मैंने कहा- कमलेश जी.. मुझे मंदिर जाना था.. यह आप कहाँ ले जा रहे हैं।

तो उन्होंने बाइक चलते हुए कहा- अरे जीजी बाई.. अभी थोड़ी देर में जंगल से बाहर निकल आते हैं इधर शेर वगैरह आते हैं। शेर का नाम सुन कर मेरी फट गई.. मैं उनसे और चिपक कर बैठ गई मेरी चूचियां उनकी पीठ से लगने लगीं।

बस थोड़ी देर बाद उन्होंने एक सुनसान जगह ले जाकर बाइक रोक दी.. वहाँ एक टूटा-फूटा पुराना घर सा बना था.. तो वे मुझे वहाँ ले गए। कमरे के अन्दर ले जाकर मेरी फोटो लेने लग गए।

मैंने कहा- कमलेश जी प्लीज़ मेरी फोटो मत लो.. मेरे पति को पता लग गया.. तो मुझे मार डालेंगे.. ‘अरे जीजाजी को कुछ पता नहीं लगेगा जीजी बाई.. बस आप फोटो लेने दो.. वास्तव में आप बहुत खूबसूरत हो.. बिल्कुल एक अप्सरा की तरह दिखती हो.. कोई भी आपको देखे तो आपको चोदे बिना नहीं रह सकता है..’

वो अपने हरामीपन पर आ गया और मेरी साड़ी ब्लाउज उतार कर मेरी नंगी फोटो लेता रहा। उसने मुझे धीरे-धीरे पूरी नंगी कर दिया और मुझसे कहा- बाहर आओ.. मैं घर से बाहर आ गई। उसने कहा- अब उस पानी की टंकी के वहाँ तक भागो.. जहाँ वो कुंड है.. उधर जानवर पानी पीते हैं।

मैंने कहा- नहीं कमलेश जी.. प्लीज़ जो करना है.. घर में अन्दर कर लो.. बाहर कोई आ जाएगा ना.. प्लीज़ कोई देख लेगा.. तो मेरी इज्जत खराब हो जाएगी। ‘जीजी बाई.. आपकी इज्जत है ही कहाँ.. जो खराब होगी.. चलो भागो.. नहीं तो आपकी फोटो जीजाजी को दे दूँगा।’

उससे चुदने का मन तो मेरा भी हो रहा था.. पर मैं कुछ नाटक भी कर रही थी। तभी उसने मेरे नंगे चूतड़ों पर एक थपकी लगा दी और मुझे भागने को कहा।

मैं भागी.. टंकी थोड़ी दूर थी। वो मेरी वीडियो बनाने में लग गया.. कभी पीछे से मेरे हिलते चूतड़ों की फिल्म बनाते.. कभी आगे से मेरी उछलती चूचियों को अपने कैमरे में कैद करते।

मैं बस भाग रही थी.. मेरे मम्मे और चूतड़ इतने जोर से हिल रहे थे कि मैं हांफने लग गई। इस समय मैं एक रंडी की तरह लग रही थी। जब टंकी के वहाँ पहुँची तो कमलेश जी ने मुझे उठा कर कुंड में डाल दिया.. मैं पूरी तरह से पानी में भीग गई थी। मैं इस वक्त बहुत ही कामुक लग रही थी।

अब कमलेश जी ने अपने पूरे कपड़े उतारे और वे भी अन्दर कुंड में आ गए और मेरे गालों को.. होंठों को.. चूमने लग गए। ‘आहह.. कमलेश जी.. नहीं.. यह ग़लत है.. मैं आपकी पत्नी की बहन हूँ..’ ‘जीजी बाई.. आपकी बहन तो मुझसे चुदवाती ही नहीं है.. आप तो मुझसे चुदवाओ ना.. आप तो वैसे भी चुदासी औरत लग रही हो.. सच्ची जीजी बाई..’

वो मेरे मम्मे मसलने लग गए और मेरी सीत्कारें निकलने लगीं- आहह.. ओह.. नहीं कमलेश जी.. ।फिर पता नहीं मैं कब उनका साथ देने लग गई थी.. वो समझ गए कि मैं अब गर्म हो गई हूँ।

तो बोलने लगे- रत्ना डार्लिंग.. तुम बहुत हॉट हो.. तुम बहुत चुदासी हो.. गाँव का हर मर्द तुझे चोदना चाहता है.. तुम कहो तो सबसे पैसे लेकर तुम्हारी चूत के नंबर लगा दूँ.. तुम्हारी भी कमाई हो जाएगी.. इतना कह कर वो मुझे भंभोड़ने लगा।

‘आह.. नहीं कमलेश.. मैं ऐसा नहीं कर सकती.. मैं एक अच्छे परिवार से हूँ.. क्या हुआ अगर मेरे पति बाहर व्यापार करते हैं.. घर पर मैं अकेली और मेरी सास तो रहती हैं।’ अब वो पानी में मेरी चुदाई करने की तैयारी में लग गए और मैं भी चुदास के चलते उनका साथ देने लग गई।

मुझे भी बाहर खुले में चुदाई करवाने की सोच कर बहुत मज़ा आ रहा था। उधर कोई नहीं था.. जंगल में एकदम सुनसान पड़ा था.. मेरे तन पर खुली धूप पड़ रही थी। ज़ोरदार तरीके से मेरी चुदाई की तैयारी चल रही थी और फिर कमलेश जी ने अपना लौड़ा निकाला। उनका लौड़ा मोटा तो था ही.. लेकिन लंबा बहुत था।

मैं नीचे बैठ कर लौड़े को हाथ में लेकर मसलने लग गई और फिर अपने होंठ लगा कर लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसने लग गई। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं ! ‘आह मुऊऊआ.. ओउउ ओअंम्मा.. आह.. कमलेश जी.. बहुत ही प्यारा है आपका लंड.. आहाहहह.. मेरी चंदा बहन को तो मज़ा आता होगा..’ चंदा कमलेश जी की पत्नी और मेरी बहन है।

कमलेश ने मुझे धरती पर चित्त लेटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए। मेरी चूत भी उनका लौड़ा लीलने की ललक में थी। मैंने चूत पसारी और उसने अपना मूसल मेरी चूत में टिका दिया.. वो अभी चूत की दरार पर अपना हल्लबी घिस ही रहा गया कि मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपने चूतड़ों को हवा में उछाला और कमलेश के लौड़े को एक ही बार में आधा खा लिया। ‘आह्ह..’ बस कमलेश भी धकापेल चोदने में लग गया।

फिर कमलेश ने मुझे टंकी पर बिठा कर बहुत देर तक अलग-अलग आसानों में चोदा और मेरे खूब सारे फोटो निकाल लिए। फिर बाद में मुझे घर लेकर आ गए थे। इसके बाद कहानी आगे भी चलती रही वो सब मैं फिर कभी लिखूंगी।

नमस्ते.. अपना प्यार सम्पादक की मेल पर जरूर लिखियेगा। [email protected]

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